बकरियों की बीमारी और आवश्यक टीकाकरण Goat Diseases and Vaccination Schedule in Hindi

बकरियों की बीमारी और आवश्यक टीकाकरण Goat Diseases and Vaccination Schedule in Hindi

बकरियों में होने वाली बीमारियों के नाम और उनसे बचने के लिए लगाए जाने वाले टीकों के नाम तथा इसके क्या-क्या फायदे हैं ये आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे।बकरियों के लिए कुछ जरूरी टीकों को लगवाना टीकाकरण कहलाता है। बकरी का व्यवसाय करने के लिए इनका टीकाकरण कराना बहुत ही आवश्यक होता है।

बकरी एक पालतू जानवर है जिससे मांस दूध प्राप्त किया जा सकता है  और इसे कोई भी आसानी से पाल सकता है भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही आधारित है जिसमें बकरी पालन का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। बकरियों में होने वाले रोगों के निवारण के लिए बकरी के नवजात बच्चों में मासिक टीकाकरण करवाना चाहिए।

बकरियों की बीमारी और आवश्यक टीकाकरण Goat Diseases and Vaccination Schedule in Hindi

टीकाकरण के महत्व Importance of Vaccination

पशु में भी टीकाकरण का लगवाना बहुत ही आवश्यक होता है टीकाकरण से सभी प्रकार के रोगजनक या रोग कारक जैसे जीवाणु, विषाणु, परजीवी, प्रोटोजोआ और कवक के संक्रमण से बचाया जा सकता है और उनके रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है। बकरियों में सर्दी, गर्मी में होने वाले मुंह पका रोग एक दिन में ही पशुओं के शरीर में खून को पानी बना देता है।

पशुओं का देखभाल के साथ साथ उन्हें बीमारियों से मुक्त रखना भी बहुत जरूरी होता है। जिसमें टीकाकरण का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है। टीकाकरण बकरियों को सभी प्रकार की बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। जब बकरियों को नियमित रूप से टीकाकरण कराया जाता है तो वह सभी प्रकार से सुरक्षित रहती हैं।

बकरियों में होने वाले बीमारी Goat Diseases

खुर पका रोग

इस रोग के रोकथाम के लिए बकरी के बच्चे को 3 माह में पहला टीका लगवाना चाहिए और वह बूस्टर टीका एक महीने बाद लगवाना चाहिए । इसके बाद प्रत्येक वर्ष लगाया जा सकता है।

बकरी प्लेग

रोग के रोकथाम के लिए इनको 3 महीने में प्रथम टीका लगवाना चाहिए।

पीपीआर

यह बीमारी बहुत ही खतरनाक एवं जानलेवा  होती है जो सबसे पहले सन् 1942 में अफ्रीका में देखा गया था परंतु यह बीमारी आज पूरे विश्व में फैल गयी है। यह बीमारी किसी भी बकरी को हो सकती है तथा जिनको हो जाता है उनका बचना बहुत ही मुश्किल होता है। इस बीमारी में बकरी के शरीर का तापमान बढ़ जाता है और नाक एवं आंखों से पानी टपकने लगता है इसलिए इसमें बकरी ज्यादातर आंखों को बंद करके रखती है।

एंथ्रेक्स बीमारी

इसे गिल्टी रोग भी कहा जाता है यह बीमारी बैसिलस एंथ्रेक्सिस नाम के जीवाणु से होता है। इस बीमारी में बकरी के नाक और मलद्वार से खून आने लगता है तथा बकरी खाने में भी असमर्थ होती है। इसमें बकरी की शरीर का तापमान लगभग 101 फॉरेनहाइट से 103 फॉरेनहाइट होता है। इसमें उनको सांस लेने में भी तकलीफ होती है। इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करते हैं तथा इससे बचने के लिए टीकाकरण कराना भी बहुत आवश्यक है।

पैर एवं मुंह की बीमारी

यह बीमारी पिकोरना  नामक विषाणु के कारण होती है इसमें तेज बुखार भी आता है तथा मुंह में, जीभ में, होठों पर और जबड़ो में छाले भी दिखाई देते हैं इस बीमारी में लगातार पशुओं के मुंह से लार निकलती रहती है तथा घाव में कीड़े भी पड़ जाते हैं इसलिये बीमार बकरी को अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए तथा समय समय पर टीकाकरण भी करवाते रहना चाहिए, जिससे बकरी सुरक्षित रहे। प्रत्येक 6 महीने में बकरी को इस बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण करवाना आवश्यक होता है।

बकरी चेचक

इसकी रोकथाम के लिए बकरियों में 3 से 5 महीने में टीकाकरण करवाना चाहिए तथा इसके बाद प्रत्येक वर्ष टीकाकरण कराया जा सकता है|

गलाघोटू रोग

इस रोग से बचने के लिए 3 महीने में ही पहला टीकाकरण करवा लेना चाहिए और बूस्टर  टीका इसके 3 से 4 सप्ताह बात करवाना चाहिए तथा 6 महीने में दो बार टीकाकरण करवा सकते हैं।

बकरी पालन के फायदे Benefits of Goat Farming in Short

बकरी पालने के कुछ बेहतरीन फायदे हैं जैसे –

  1. बकरी पालन के लिए बहुत कम जगह की जरूरत होती है और कोई भी आसानी से यह व्यवसाय कर सकता है।
  2. बकरी को हम खुली जगह में चरा सकते हैं इसलिए इनके खाने का खर्च भी ज्यादा नहीं आता है।
  3. बकरी चाहे गर्मी हो या सर्दी हो यह आराम से अपने आप को ढाल लेती हैं वातावरण के अनुसार।
  4. बकरी का व्यवसाय कम पैसों में शुरू किया जा सकता है और यह साल में दो बार बच्चे पैदा करती हैं इसलिए इसमें फायदा भी जल्दी  और आसानी से होता है।
  5. बकरियां अन्य पशुओं की तुलना में छोटी होती है परंतु यह जल्दी ही परिपक्व होती हैं।
  6. इनकी मांस का प्रयोग लोग खाने में करते हैं तथा दूध का उपयोग विभिन्न रोगों में औषधि के रूप में  किया जाता है।
  7. बकरी की खाल का उपयोग वाद्य यंत्र बनाने में एवं बालों का उपयोग फाइबर बनाने में किया जाता है।

टीकाकरण के समय इन बातों का ध्यान दें

बकरी को टीकाकरण करने से पहले इन चीजों का ध्यान दें –

  • डी वार्मिंग के 5-7 दिन बाद ही टीकाकरण करें।
  • बकरी का स्वास्थ्य अगर ठीक नहीं है तो टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए
  • वैक्सीन की मात्रा सही होनी चाहिए।
  • वैक्सीन का तापमान ठीक होना चाहिए। सभी वैक्सीन कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है।
  • टीकाकरण के प्रकार की जानकारी पक्का रखें।
  • हमेशा नई सुई का उपयोग करें।

बकरियों में लगने वाले प्रमुख टीकों के नाम

यह कुछ मुख्य टिके हैं बकरीयों के लिए। किसी भी पशु चिकित्सक (Veterinary Surgeon – VS) से पूछ कर सही समय में बीमारी से पहले प्रतिवर्ष नियमित रूप से बकरी का टीकाकरण करवाएं।

  • PPR – 1ml
  • FMD – 2ml
  • HS – 2ml
  • ET – 2ml
  • Goat pax – 2ml
  • Anthrax
  • Tetanus
  • Black Quater
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