देसी मुर्गी पालन के फायदे Advantages of Desi Free Range Chicken Breed in Hindi

देसी मुर्गी पालन के फायदे Advantages of Desi Free Range Chicken Breed in Hindi
देसी मुर्गी या Free Range Chicken ब्रायलर मुर्गियों से बहुत अलग होती है। इन मुर्गियां का ब्रायलर मुर्गियों की तुलना में बहुत धीरे विकास होता है। फ्री रेंज चिकन को 1-2 किलो का वज़न तक होने में लगभग 4-5 महिना लगता है। यह मुर्गियां ब्रायलर मुर्गियों के मुकाबले बहुत शक्तिशाली और सक्रिय होते हैं और बाज़ार में भी ब्रायलर मुर्गियों कि तुलना में इसकी तीन गुना अधिक मूल्य में बिक्री होती है। देसी मुर्गी कि सबसे ख़ास बात यह होती है की इसमें मुर्गी दाना की सबसे कम ज़रुरत पड़ती है और बहुत कम जगह में यह आराम से रह जाती हैं इसलिए इनको बड़ी आसानी से आप पाल सकते हैं।

देसी मुर्गी पालन के फायदे Advantages of Desi Free Range Chicken Breed in Hindi

मुर्गीपालन का फायदा और बढ़ता महत्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां पर लोग खेती एवं पशुपालन करके अपना जीवन यापन करते हैं।  आजकल लोग पशुपालन की तरफ ज्यादा अग्रसर हो रहे हैं जिसमें मुर्गी पालन को भी एक बहुत अच्छा व्यवसाय माना जाता है। पहले के समय मे लोग गाय, भैंस, भेड़ आदि जानवरों को पालते थे तथा इनसे लाभ कमाते थे परंतु आजकल के समय मे देसी मुर्गी का पालन भी एक ऐसा व्यवसाय बन गया है जो व्यक्ति को एक अतिरिक्त आय का साधन प्रदान करता है।

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इसमें कम लागत पर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है परंतु इसमें आपकी मेहनत और लगन पर सब कुछ निर्भर है क्योंकि इनमे संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है इसीलिये आप जितनी मेहनत से और अच्छे से इनकी देखभाल करेंगे इनसे उतना ही अधिक लाभ होगा। भारत में दिन-प्रतिदिन देसी मुर्गी पालन के व्यवसाय का प्रचलन बढ़ता जा रहा है भारत अंडो के उत्पाद में तीसरे नंबर पर और मांस के उत्पाद में पांचवें नंबर पर है।

ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न स्तर पर मुर्गी पालन का व्यवसाय किया जा सकता है और अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सकता है। मुर्गी पालन का व्यवसाय अधिकतर अंडे एवं मांस उत्पादन के लिए किया जाता है क्योकि देशी मुर्गी के अंडे तथा मांस में मानव पोषण के लिए सबसे आवश्यक तत्व, प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है।

इसके साथ ही साथ मुर्गियों के कूड़े (litter) से खेतों को उपजाऊ भी बनाया जा सकता है क्योकि जितना एक गाय के गोबर से एक खेत को उपजाऊ बनाया जा सकता है उतना ही 40 मुर्गियों के बिष्ठों से एक खेत को उपजाऊ बनाया जा सकता है। अगर मुर्गी पालन में सही प्रजाति के चूजे, देखभाल, पौष्टिक आहार, बिमारियों से बचने का टीका एवं साफ़ सफाई सही ढंग से किया जाए तो एक बेहतर आय बनाई जा सकती है।

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भारत में देसी मुर्गी के कुछ मुख्या प्रजातियाँ

भारत मे मुर्गियों की बहुत सी प्रजातियां पायी जाती है लेकिन इन सभी प्रजातियों में से देशी मुर्गियों की प्रजाति पालन की दृष्टि से सबसे उपयुक्त होती है। देसी मुर्गी तीन प्रकार की होती है, आप इनमें से अपने अनुसार चुन सकते हैं :-

  1. ग्रामप्रिया
  2. श्रीनिधि
  3. वनराजा

ग्रामप्रिया

इस प्रजाति की मुर्गियाँ दोहरी उपयोगिता वाली होती है अर्थात् ये मुर्गियाँ अंडे और माँस दोनों देने वाली होती हैं। 1.5 डेढ़ साल में यह 200 से 225 अंडे तक देती है तथा इसका वजन 1.5 किलोग्राम से 2 किलोग्राम तक होता है।

श्रीनिधि

इस प्रजाति की भी मुर्गियां दोहरी उपयोगिता वाली होती हैं यह लगभग 210 से 230 अंडे तक देती है। इनका वजन 2.5 किलोग्राम से 5 किलोग्राम तक होता है जो कि ग्रामीण मुर्गियों से काफी ज्यादा होता है और इन से अधिक मात्रा में मांस और अंडे दोनों के जरिए अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इस प्रजाति की  मुर्गियों का विकास काफी तेजी से होता है।

वनराजा

शुरुआत में मुर्गी पालन करने के लिए यह प्रजाति सबसे अच्छी मानी जाती है ये मुर्गी 3 महीने में 120 से 130 अंडे तक देती हैं और इसका वज़न भी 2.5-5 किलो तक जाता है।  हलाकि यह प्रजाति अन्य दोनों प्रजाति से थोडा कम क्रियात्मक और सक्रिय रहते हैं।

अगर आप भी मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो इन तीनों में से आप कोई भी प्रजाति की मुर्गियों का पालन कर सकते हैं अगर आप इन मुर्गियों की देखभाल अच्छे से कर पाते हैं तो इन मुर्गियों से आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

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सरकार भी आजकल मुर्गी पालन के व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है , सरकार भी इसके लिए आसानी से लोन सुविधा भी प्रदान करती है अगर आप चाहे तो लोन लेकर ये व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। सरकार कई रिसर्च कंपनियों के साथ मिलकर कुछ अलग प्रकार की देसी मुर्गियों का निर्माण किया है जिनको पालकर अच्छा खासा लाभ कमाया जा सकता है।

आप मुर्गी पालन के व्यवसाय को बहुत छोटे पैमाने से ही शुरू कर सकते हैं। इसमें कोई जरूरी नहीं है कि बहुत ज्यादा पैसा ही लगाकर बिजनेस शुरू कर सकते हैं इसको आप 5 से 10 मुर्गियों के साथ बिजनेस शुरू कर सकते हैं। और धीरे-धीरे मेहनत और लगन के साथ इस बिजनेस को एक बड़े पैमाने पर ले जा सकते हैं।